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वाराही

देवी एवं उपासना

अन्य नाम: वैराली, बाराही, वाराही पंचमी

सप्तमातृकामातृकापाताल-शक्ति

वाराही सप्तमातृका में पाँचवीं हैं और भगवान वराह (विष्णु के तृतीय अवतार) की शक्ति हैं। इनका मुख सूकर (वराह) का है और वर्ण कृष्ण या तूफानी बादल के समान श्याम है। वे महिष (भैंस) पर आरूढ़ होती हैं और हाथों में दंड, खड्ग, हल तथा पाश धारण करती हैं।

इनका वर्णन देवी महात्म्य, वराह पुराण, मत्स्य पुराण तथा विष्णुधर्मोत्तर पुराण में मिलता है। तांत्रिक परंपरा में वाराही को अत्यंत शक्तिशाली और रहस्यमय मातृका माना जाता है।

इनका बीज मंत्र 'ग्लौं' है। उपासना से पाताल-शक्ति, शत्रु-दमन और रक्षा की प्राप्ति होती है। वाराही को 'वाराही पंचमी' के रूप में भी पूजा जाता है।

प्रसिद्ध कथन

ग्लौं — वाराही का बीज मंत्र।

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विष्णुशक्तिचामुंडादेवी भागवत पुराणदुर्गा

स्रोत: वराह पुराण; देवी महात्म्य