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शक्ति

शब्दावली

अन्य नाम: देवी शक्ति, आदिशक्ति

देवीतंत्रउपासना

शक्ति का अर्थ है सामर्थ्य या ऊर्जा। वेदांत तथा तंत्र की दृष्टि से शक्ति ब्रह्म की वह चेतन शक्ति है जिससे सृष्टि उत्पन्न होती है, स्थित रहती है और नष्ट होती है। शक्ति के बिना ब्रह्म निष्क्रिय माना जाता है; इसीलिए शक्ति को ब्रह्म की क्रियाशीलता कहा गया है। देवी-उपासना में यही शक्ति माँ के रूप में पूजित होती है।

शाक्त परंपरा में शक्ति ही सर्वोच्च तत्व है। त्रिदेवों की भी अपनी शक्तियाँ मानी गई हैं — ब्रह्मा की शक्ति सरस्वती, विष्णु की लक्ष्मी तथा शिव की पार्वती (दुर्गा)। दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती तथा गायत्री आदि शक्ति के ही स्वरूप हैं। नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है।

तंत्र शास्त्रों में शक्ति को कुंडलिनी के रूप में मानव-शरीर में स्थित बताया गया है, जिसके जागरण से साधक को आत्म-साक्षात्कार प्राप्त होता है। शक्ति तथा पुरुष सृष्टि के मूल आधार हैं — जैसे शिव और शक्ति। भक्तों के लिए माँ शक्ति करुणा तथा रक्षा की देवी हैं।

प्रसिद्ध कथन

शक्ति के बिना ब्रह्म निष्क्रिय है — शक्ति ही उसकी क्रियाशीलता है। (भावानुवाद — शाक्त दर्शन)

संबंधित

दुर्गाशक्तिपीठतंत्रमायाप्रकृतित्रिदेव

स्रोत: देवी भागवत