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चामुंडा

देवी एवं उपासना

अन्य नाम: चामुंडी, चर्चिका, काली-स्वरूपा

सप्तमातृकामातृकाउग्र रूप

चामुंडा सप्तमातृका में सातवीं और सबसे उग्र हैं। वे देवी चंडिका (दुर्गा) की शक्ति मानी जाती हैं और उन्हें काली के स्वरूप से जोड़ा जाता है। इनका वर्ण कृष्ण या रक्त है, शरीर दुर्बल और नेत्र धँसे हुए हैं। गले में मुंडमाला है, हाथों में खड्ग, त्रिशूल और कपाल धारण हैं तथा वे शव या प्रेत पर आरूढ़ होती हैं।

इनका वर्णन देवी महात्म्य (मार्कंडेय पुराण) में विशेष रूप से मिलता है, जहाँ उन्होंने चंड और मुंड नामक असुरों का वध किया। इसी कारण उनका नाम चामुंडा पड़ा। वराह पुराण और विष्णुधर्मोत्तर पुराण में भी इनका वर्णन है।

इनका बीज मंत्र 'क्रीं' है। उपासना से शत्रु-नाश, तंत्र-बाधा से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। चामुंडा तंत्र-साधना की अत्यंत प्रबल देवी मानी जाती हैं।

प्रसिद्ध कथन

ॐ क्रीं चामुंडायै नमः॥
ॐ चामुंडायै विच्चे॥ (देवी महात्म्य का बीज-मंत्र)

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दुर्गाकालीशक्तिशक्तिपीठदेवी भागवत पुराण

स्रोत: देवी महात्म्य (मार्कंडेय पुराण)