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इंद्राणी

देवी एवं उपासना

अन्य नाम: ऐन्द्री, वज्रिणी, माहेन्द्री

सप्तमातृकामातृकाराज-सत्ता

इंद्राणी (ऐन्द्री) सप्तमातृका में छठी हैं और देवराज इंद्र की शक्ति हैं। इनका वर्ण स्वर्णिम या लाल है, तीन नेत्र हैं और वे ऐरावत (हाथी) पर आरूढ़ होती हैं। हाथों में वज्र, अंकुश और कमल धारण करती हैं। इंद्र की भाँति इन्हें भी सहस्र-नेत्रा कहा जाता है।

इनका वर्णन देवी महात्म्य, वराह पुराण तथा विष्णुधर्मोत्तर पुराण में मिलता है। इंद्र देवताओं के राजा हैं, अतः इनकी शक्ति राज-सत्ता और ऐश्वर्य की प्रतीक मानी जाती है।

इनका बीज मंत्र 'ऐं' है और वे ऐरावत-वाहिनी हैं। उपासना से राज-सत्ता, ऐश्वर्य, यश और स्वर्गीय सुख की प्राप्ति होती है।

प्रसिद्ध कथन

ऐं — इंद्राणी का बीज मंत्र।

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स्रोत: विष्णुधर्मोत्तर पुराण; देवी महात्म्य