कौमारी
देवी एवं उपासना
अन्य नाम: कुमारी, कार्तिकी, कार्तिकेयी
कौमारी सप्तमातृका में चतुर्थ हैं और भगवान कार्तिकेय (कुमार) की शक्ति हैं। इनका वर्ण लाल है और वे मयूर (मोर) पर आरूढ़ होती हैं। चार हाथों में शक्ति (भाला) और वज्र धारण करती हैं तथा शेष दो हाथ अभय और वरद मुद्रा में रहते हैं। कभी-कभी इन्हें कुमार के समान छह मुखों वाली भी दर्शाया जाता है।
इनका वर्णन देवी महात्म्य, वराह पुराण, मत्स्य पुराण तथा विष्णुधर्मोत्तर पुराण में मिलता है। कार्तिकेय युद्ध के देवता हैं, अतः इनकी शक्ति को साहस और पराक्रम की प्रतीक माना जाता है।
इनका बीज मंत्र 'क्लीं' है और वे मयूर-वाहिनी हैं। उपासना से साहस, यश, विजय और संतान-सुख की प्राप्ति होती है।
प्रसिद्ध कथन
क्लीं — कौमारी का बीज मंत्र।
संबंधित
स्रोत: विष्णुधर्मोत्तर पुराण; देवी महात्म्य