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माहेश्वरी

देवी एवं उपासना

अन्य नाम: रौद्री, रुद्राणी, शिवानी

सप्तमातृकामातृकासंहार-शक्ति

माहेश्वरी सप्तमातृका में तृतीय हैं और भगवान शिव (महेश्वर) की शक्ति हैं। इनका वर्ण श्वेत है, तीन नेत्र हैं और वे नंदी (वृषभ) पर आरूढ़ होती हैं। हाथों में त्रिशूल, डमरू, अक्षमाला और कपाल धारण करती हैं। इनके मुकुट पर चंद्र शोभित है और अंगों में सर्प आभूषण हैं।

इनका वर्णन देवी महात्म्य, वराह पुराण, विष्णुधर्मोत्तर पुराण तथा देवी भागवत पुराण में मिलता है। शिव की विभिन्न शक्तियों के रूप में इन्हें रौद्री और रुद्राणी भी कहा जाता है।

इनका बीज मंत्र 'ह्रीं' है और वे वृषभ-वाहिनी हैं। उपासना से विघ्न-नाश, मोक्ष तथा शिव-कृपा की प्राप्ति होती है।

प्रसिद्ध कथन

ह्रीं — माहेश्वरी का बीज मंत्र।

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स्रोत: विष्णुधर्मोत्तर पुराण; देवी महात्म्य