कमला
देवी एवं उपासना
अन्य नाम: कमलात्मिका, तांत्रिक लक्ष्मी, महालक्ष्मी, भार्गवी
कमला दस महाविद्याओं में दसवीं और अंतिम हैं। 'कमल' अर्थात कमल — वे कमल पर विराजमान, कमल-धारिणी और कमल-नेत्रा हैं। इनका वर्ण स्वर्ण के समान चमकीला है, तीन शांत नेत्र हैं तथा दो हाथों में कमल और दो हाथों में अभय और वरद मुद्रा धारण हैं। चार श्वेत हाथी इन्हें जल से स्नान कराते हैं। वे लक्ष्मी की तांत्रिक स्वरूप हैं।
कमला का वर्णन देवी भागवत पुराण तथा शाक्त तंत्र-ग्रंथों में मिलता है। इन्हें श्रीसूक्त और कनकधारा स्तोत्र से जोड़ा जाता है। समुद्र-मंथन से प्रकट महालक्ष्मी का स्वरूप इनसे ही जुड़ा माना जाता है।
इनका बीज 'श्रीं' और मूल मंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' है। उपासना से धन, समृद्धि, व्यापार-वृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है तथा साथ ही मोक्ष का मार्ग भी खुलता है।
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: देवी भागवत पुराण; श्रीसूक्त