शक्तिपीठ
शब्दावली
अन्य नाम: शक्ति पीठ, सती पीठ
शक्तिपीठ शब्द का अर्थ है शक्ति का आसन या स्थान। पुराणों के अनुसार जब भगवान शिव माता सती का शव लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के अंग-अलंग अलग-अलग कर दिए। जहाँ-जहाँ सती के अंग, आभूषण या वस्त्र गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए।
शक्तिपीठों की संख्या सामान्यतः 51 मानी जाती है, यद्यपि कुछ ग्रंथों में 52 तथा अन्य संख्याएँ भी मिलती हैं। प्रत्येक शक्तिपीठ में देवी की भिन्न नाम से पूजा होती है तथा वहाँ भैरव (शिव) भी विराजमान माने जाते हैं। जैसे कामाख्या (कामरूप), विशालाक्षी (काशी), ज्वालामुखी, वैष्णो देवी तथा शारदा पीठ आदि प्रसिद्ध शक्तिपीठ हैं।
ये शक्तिपीठ माता की उपासना तथा तीर्थ-यात्रा के प्रमुख केंद्र हैं। तंत्र-साधना में शक्तिपीठों का विशेष महत्व है। वैष्णो देवी (जम्मू), ज्वालाजी (हिमाचल) तथा कामाख्या (असम) आदि आज भी करोड़ों भक्तों के आस्था-केंद्र हैं।
प्रसिद्ध कथन
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स्रोत: देवी भागवत