ब्राह्मणी
देवी एवं उपासना
अन्य नाम: ब्राह्मी, ब्रह्माणी
ब्राह्मणी (ब्राह्मी) सप्तमातृका में प्रथम हैं और भगवान ब्रह्मा की शक्ति हैं। इनका वर्ण स्वर्ण या पीला है, चार मुख हैं और वे हंस पर आरूढ़ होती हैं। हाथों में अक्षमाला, कमंडलु, पुस्तक (वेद) तथा अभय और वरद मुद्रा धारण करती हैं। वे विद्या, बुद्धि और वाणी की अधिष्ठात्री हैं।
सप्तमातृका का वर्णन देवी महात्म्य (मार्कंडेय पुराण), मत्स्य पुराण, वराह पुराण, वामन पुराण तथा देवी भागवत पुराण में मिलता है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार — 'जिस देव का जो रूप, आभूषण और वाहन है, वैसा ही उनकी मातृका (शक्ति) का रूप कहा गया है।'
इनका बीज मंत्र 'ऐं' है और वे हंस-वाहिनी हैं। उपासना से विद्या, वाणी-शक्ति, बुद्धि और सृजनात्मकता की प्राप्ति होती है। सरस्वती की उपासना में भी ब्राह्मणी की पूजा सम्मिलित मानी जाती है।
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: मार्कंडेय पुराण; देवी महात्म्य