भुवनेश्वरी
देवी एवं उपासना
अन्य नाम: भुवन-ईश्वरी, विश्वमाता, माया
भुवनेश्वरी दस महाविद्याओं में चतुर्थ हैं। 'भुवन' अर्थात लोक और 'ईश्वरी' अर्थात स्वामिनी — वे समस्त चौदह लोकों और ब्रह्मांड की जननी हैं। इनका वर्ण गोरा-सुनहरा है, तीन शांत नेत्र हैं और हाथों में अंकुश तथा पाश धारण हैं। इनका स्वरूप सौम्य और करुणामय है। वे आकाश तत्व की अधिष्ठात्री हैं।
भुवनेश्वरी का वर्णन देवी भागवत पुराण तथा अनेक शाक्त तंत्र-ग्रंथों में मिलता है। इन्हें विश्व-माता और माया-शक्ति के रूप में पूजा जाता है।
इनका बीज मंत्र 'ह्रीं' और मूल मंत्र 'ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः' है। उपासना से साधक संसार में रहते हुए भी कीचड़ में कमल के समान निर्लेप रहता है। ये संतान, अभय, ऐश्वर्य और मोक्ष प्रदान करती हैं।
प्रसिद्ध कथन
ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः॥
ह्रीं — भुवनेश्वरी का बीज मंत्र।
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स्रोत: देवी भागवत पुराण; तंत्र-परंपरा