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बगलामुखी

देवी एवं उपासना

अन्य नाम: बगला, पीताम्बरा, वल्गामुखी

महाविद्याउग्र रूपस्तंभन

बगलामुखी, जिन्हें पीताम्बरा भी कहते हैं, दस महाविद्याओं में आठवीं हैं। इनका वर्ण पिघले सोने के समान पीला है, तीन नेत्र हैं और पीले वस्त्र तथा पीले आभूषण धारण हैं। एक हाथ में गदा और दूसरे हाथ में शत्रु की जिह्वा पकड़े हुए दर्शायी जाती हैं। वे स्तंभन की देवी हैं — अर्थात वे शत्रु की वाणी, चेष्टा और बुद्धि को ठहरा देती हैं।

इनका वर्णन मंत्र महोदधि, बगलामुखी तंत्र तथा तोडल तंत्र में मिलता है। महाभारत-काल से इनकी उपासना का प्रचलन माना जाता है।

इनका बीज 'ह्लीं' और मूल मंत्र 'ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा' है। उपासना पीले आसन, पीले वस्त्र और हल्दी की माला से की जाती है। इससे रोग, शत्रु-बाधा, वाद-विवाद और मुकदमे में विजय तथा धन-प्राप्ति होती है।

प्रसिद्ध कथन

ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा॥
ह्लीं — बगलामुखी का बीज मंत्र।

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स्रोत: मंत्र महोदधि; तंत्र-परंपरा