कुंभकर्ण
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: कुंभकर्ण
कुंभकर्ण रावण का भाई, विश्रवा और कैकसी का पुत्र तथा विभीषण का सहोदर था। वह अत्यंत विशालकाय और बलवान था।
तपस्या से उसे मनचाहा वरदान माँगने का अवसर मिला, परंतु सरस्वती के प्रभाव से उसने 'इंद्रासन' के स्थान पर 'निद्रासन' माँग लिया; तब ब्रह्मा ने उसे छह माह सोने और छह माह जागने का वर दिया।
युद्ध के समय उसे जगाया गया; उसने पहले रावण को नीति-पूर्ण सलाह दी कि सीता लौटा दो और राम से बैर छोड़ो, परंतु रावण ने न माना। तब भाई के पक्ष में लड़ते हुए वह राम के हाथों मारा गया।
वे बल और विवेक — दोनों के प्रतीक हैं; उनकी नीति-सलाह रामायण का महत्त्वपूर्ण प्रसंग है।
नाते-रिश्ते
- पिता: विश्रवा
- माता: कैकसी
- भाई: रावण, विभीषण
- बहन: शूर्पणखा
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
पूर्वजन्म में विष्णु-द्वारपाल जय-विजय में से एक (विजय)
प्रसिद्ध कथन
रावण से: "हे भ्राता, राम से बैर छोड़कर सीता लौटा दो; यही लंका के कल्याण का मार्ग है।" (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण – युद्धकाण्ड; रामचरितमानस – लंकाकाण्ड