हनुमान
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: आंजनेय, मारुति, पवनपुत्र, बजरंगबली, महावीर, संकटमोचन
हनुमान अंजनी और केसरी के पुत्र तथा वायुदेव के वरद-पुत्र थे; अतः 'आंजनेय', 'मारुति' और 'पवनपुत्र' कहलाए। बाल्यकाल में सूर्य को फल समझकर निगलने चले, तब इंद्र के वज्र से उनकी हनु (ठोड़ी) टूटी, इसी से 'हनुमान' नाम पड़ा।
वे सुग्रीव के मंत्री और किष्किंधा के प्रमुख वानर थे। जांबवान के स्मरण कराने पर उन्होंने अपने बल का बोध किया और समुद्र लाँघकर लंका पहुँचे। सुन्दरकाण्ड में उनका चरित्र मुख्य है — अशोक वाटिका में सीता को राम की मुद्रिका देना, अक्षयकुमार का वध, ब्रह्मास्त्र में बंधना, लंका-दहन और संजीवनी लाना।
लक्ष्मण के लिए संजीवनी-बूटी लाने हेतु उन्होंने पूरा पर्वत उठाया। कलियुग में वे चिरंजीवी के रूप में राम-नाम के प्रचारक माने जाते हैं; तुलसीदास ने 'हनुमान चालीसा' में उनकी स्तुति की।
वे बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति — चारों गुणों के समन्वय हैं; जहाँ राम-कथा होती है वहीं हनुमान विराजते हैं।
नाते-रिश्ते
- पिता: केसरी (वायुदेव वरद)
- माता: अंजनी
- प्रभु: श्रीराम
- मित्र: सुग्रीव
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
शिव का रुद्रांश अवतार
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: रामचरितमानस – सुन्दरकाण्ड; वाल्मीकि रामायण – किष्किंधाकाण्ड