विभीषण
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: विभीषण
विभीषण रावण का सबसे छोटा भाई था; वह ऋषि विश्रवा और कैकसी का पुत्र तथा कुंभकर्ण और शूर्पणखा का भाई था। वह सदा धर्म और नीति का पक्षधर रहा।
सीता-हरण के बाद उसने रावण को अनेक बार सीता लौटाने और राम से संधि करने की सलाह दी। क्रुद्ध रावण ने उसका अपमान किया, तब वह लंका छोड़कर राम की शरण में पहुँचा।
राम ने 'सरणागत' को अभय दिया, यद्यपि सुग्रीव आदि को संदेह था। विभीषण ने राम को लंका के रहस्य, रावण की दुर्बलताएँ तथा युद्ध-नीति बताईं। रावण-वध के बाद राम ने उसे लंका का राजा बनाया।
वे धर्म-निष्ठा और शरणागति के आदर्श हैं; रामायण में 'धर्म का साथ' उनके चरित्र से सिद्ध होता है।
नाते-रिश्ते
- पिता: विश्रवा
- माता: कैकसी
- भाई: रावण, कुंभकर्ण
- बहन: शूर्पणखा
- पत्नी: सरमा
प्रसिद्ध कथन
रावण से: "हे भ्राता, राम से बैर त्यागकर सीता को लौटा दो, अन्यथा लंका का नाश निश्चित है।" (भावानुवाद)
राम से शरण माँगते हुए: "मैं आपकी शरण में आया हूँ; मुझे अभय दीजिए।" (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण – युद्धकाण्ड; रामचरितमानस – लंकाकाण्ड