वन पर्व
ग्रंथ
अन्य नाम: वनपर्व, वन पर्व, आरण्यक पर्व, तृतीय पर्व
रचयिता / कर्ता: वेदव्यास / वैशंपायन-सूत
वन पर्व (आरण्यक पर्व) महाभारत का तीसरा और सबसे विस्तृत पर्व है। इसमें पांडवों के बारह वर्ष के वनवास का वर्णन है।
इसमें अर्जुन की तपस्या और शिव से पाशुपतास्त्र की प्राप्ति (किरातार्जुनीय), अर्जुन का इंद्रलोक-गमन तथा तीर्थयात्रा के प्रसंग हैं।
इसमें नल-दमयंती, सावित्री-सत्यवान तथा रामायण की कथा जैसे अनेक उपाख्यान हैं, साथ ही दुर्वासा का प्रसंग और कुंती-कर्ण की भेंट भी।
पर्व के अंत में जयद्रथ-वध और यक्ष-प्रश्न (धर्म-युधिष्ठिर संवाद) आते हैं। यह पर्व धर्म, नीति और कथा-वैविध्य के लिए प्रसिद्ध है।
संबंधित
स्रोत: महाभारत, वन पर्व