विराट पर्व
ग्रंथ
अन्य नाम: विराटपर्व, विराट पर्व, चतुर्थ पर्व
रचयिता / कर्ता: वेदव्यास / वैशंपायन-सूत
विराट पर्व महाभारत का चौथा पर्व है, जिसमें पांडव अपने तेरहवें वर्ष का अज्ञातवास विराट नगर में पूरा करते हैं।
इसमें पांडव अलग-अलग वेश धारण करते हैं — युधिष्ठिर राजा के सभासद, भीम रसोइया, अर्जुन वृहन्नला, नकुल-सहदेव अश्व-गो-पाल, और द्रौपदी सैरंध्री बनती हैं।
इसमें कीचक का वध (भीम द्वारा) तथा दुर्योधन द्वारा विराट की गायों का हरण और उत्तर-गोग्रहण का प्रसंग है, जिसमें अर्जुन ने अकेले कौरव-सेना को पराजित किया।
अज्ञातवास पूर्ण होने पर अर्जुन का विराट की पुत्री उत्तरा के साथ विवाह होता है। यह पर्व अज्ञातवास की समाप्ति और युद्ध की निकटता दर्शाता है।
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स्रोत: महाभारत, विराट पर्व