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जयद्रथ

महाभारत

अन्य नाम: सिंधुराज, वृद्धक्षत्रपुत्र, जयद्रथ

सिंधुदुर्योधनअभिमन्युप्रतिज्ञाकुरुक्षेत्र

जयद्रथ सिंधु देश के राजा वृद्धक्षत्र के पुत्र थे और धृतराष्ट्र की पुत्री दुःशला से उनका विवाह हुआ था, इसीलिए वे दुर्योधन के जीजा थे। वनवास-काल में उन्होंने द्रौपदी का हरण करने का प्रयास किया, परंतु पांडवों ने उन्हें पकड़कर अपमानित किया और युधिष्ठिर के कहने पर छोड़ दिया।

कुरुक्षेत्र युद्ध में द्रोण ने चक्रव्यूह रचा और अभिमन्यु को अकेले फँसाने का षड्यंत्र बनाया। जयद्रथ को वरदान था कि वे एक दिन तक पांडवों को व्यूह के द्वार पर रोक सकते थे; उन्होंने यही किया, जिससे अभिमन्यु अकेला रह गया और मारा गया।

अभिमन्यु की मृत्यु से क्रुद्ध अर्जुन ने प्रतिज्ञा की कि यदि अगले दिन सूर्यास्त से पूर्व जयद्रथ का वध नहीं हुआ, तो वे स्वयं अग्नि में प्रवेश करेंगे। कृष्ण की कूटनीति से सूर्यास्त के बाद का भ्रम उत्पन्न हुआ और अर्जुन ने जयद्रथ का वध करके अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। जयद्रथ कायरता और षड्यंत्र के प्रतीक पात्र हैं।

नाते-रिश्ते

  • पत्नी: दुःशला
  • पिता: वृद्धक्षत्र (सिंधुराज)
  • ससुर: धृतराष्ट्र

प्रसिद्ध कथन

अर्जुन की प्रतिज्ञा (भावानुवाद) — “कल सूर्यास्त से पूर्व यदि मैं जयद्रथ का वध न कर सका, तो मैं अग्नि में प्रवेश करूँगा।”
कृष्ण की कूटनीति (भावानुवाद) — “सूर्यास्त का भ्रम रचो, जिससे जयद्रथ अपनी गुप्त-स्थिति से बाहर आ जाए।”

संबंधित

दुर्योधनअभिमन्युअर्जुनद्रौपदीद्रोणाचार्यकुरुक्षेत्र

स्रोत: महाभारत – वन पर्व; द्रोण पर्व