वाजपेय
शब्दावली
अन्य नाम: वाजपेय यज्ञ
वाजपेय एक विशिष्ट सोमयाग है। 'वाज' अर्थात् अन्न, बल या वेग और 'पेय' अर्थात् पेय — इस प्रकार वाजपेय बल-प्रदायक पान का यज्ञ है। यह अग्निष्टोम का ही रूपांतर है।
शास्त्रीय आधार — शुक्ल यजुर्वेद का नवाँ अध्याय, शतपथ ब्राह्मण तथा तैत्तिरीय ब्राह्मण में इसका वर्णन मिलता है।
विधि एवं महत्व — इसमें सत्रह की संख्या सर्वत्र प्रधान है — सत्रह ऋत्विज, सत्रह स्तोत्र-शस्त्र, सत्रह रथों की दौड़ तथा सत्रह दिन का अनुष्ठान। यह शरद् ऋतु में किया जाता था और इसे ब्राह्मण या क्षत्रिय ही कर सकते थे। शतपथ ब्राह्मण के अनुसार वाजपेय से सम्राट्-पद की प्राप्ति होती है।
प्रसिद्ध कथन
वाजपेयेन सम्राट् भवति — वाजपेय से सम्राट् की पदवी प्राप्त होती है। (भावानुवाद, शतपथ ब्राह्मण)
संबंधित
स्रोत: शुक्ल यजुर्वेद, शतपथ ब्राह्मण