शास्त्रज्ञग्रंथ, पात्र, कथाएँ, स्थान एवं शब्द — एक जगह

अग्निहोत्र

शब्दावली

अन्य नाम: अग्निहोत्र यज्ञ

यज्ञहविर्यज्ञनित्यकर्म

अग्निहोत्र वैदिक धर्म का सर्वाधिक मूलभूत नित्य यज्ञ है, जो गृहस्थ द्वारा प्रतिदिन दो बार — सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय — किया जाता है। इसमें दूध अथवा घृत की आहुति दी जाती है।

शास्त्रीय आधार — यजुर्वेद तथा शतपथ ब्राह्मण में इसे नित्यकर्म के रूप में वर्णित किया गया है। इसे हविर्यज्ञों में प्रथम स्थान प्राप्त है।

विधि एवं महत्व — प्रातःकाल 'सूर्याय स्वाहा' तथा सायंकाल 'अग्नये स्वाहा' मंत्र से आहुति दी जाती है; दोनों के साथ 'प्रजापतये स्वाहा' भी होता है। इसे गृहस्थ का अनिवार्य धर्म माना गया और कहा गया कि जो इसे नहीं करता वह ऋणी रहता है। दूध, घी तथा चावल आदि इसके प्रधान द्रव्य हैं।

प्रसिद्ध कथन

अग्नये स्वाहा, अग्नय इदं न मम । प्रजापतये स्वाहा, प्रजापतय इदं न मम ॥ (यजुर्वेद — सायंकालीन अग्निहोत्र मंत्र)

संबंधित

यज्ञहवनहोमदर्श-पूर्णमासपंचमहायज्ञचार वेद

स्रोत: यजुर्वेद, शतपथ ब्राह्मण