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अग्निष्टोम

शब्दावली

अन्य नाम: अग्निष्टोम यज्ञ, ज्योतिष्टोम

यज्ञश्रौतसोमयाज्ञ

अग्निष्टोम सोमयज्ञों में सर्वप्रथम तथा मूलभूत यज्ञ है। 'अग्नि' तथा 'स्तोम' (स्तुति) से बना यह नाम इस ओर संकेत करता है कि इसका सम्बन्ध अग्नि की स्तुति से है।

शास्त्रीय आधार — शुक्ल यजुर्वेद तथा तैत्तिरीय संहिता, शतपथ ब्राह्मण एवं कात्यायन और आपस्तम्ब आदि श्रौतसूत्रों में इसकी विधि विस्तार से वर्णित है।

विधि एवं महत्व — इसमें तीन सवन (प्रातः, मध्याह्न तथा सायं) होते हैं, जिनमें बारह स्तोत्र तथा बारह शस्त्र गाए और पढ़े जाते हैं। यजमान सहित सत्रह ऋत्विज इसमें भाग लेते हैं। समस्त सोमयागों की प्रकृति (आदर्श) अग्निष्टोम ही मानी गई है; उक्थ्य, षोडशी, वाजपेय तथा अतिरात्र आदि इसी के रूपांतर हैं।

प्रसिद्ध कथन

अग्निष्टोम समस्त सोमयागों की प्रकृति अर्थात् मूल आदर्श है। (भावानुवाद)

संबंधित

सोमयज्ञयज्ञअग्निहोत्रवाजपेयअग्निचयनहवन

स्रोत: शतपथ ब्राह्मण, तैत्तिरीय संहिता