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त्रिशूल

शब्दावली

अन्य नाम: त्रिशूल, शूल

मूर्ति-शास्त्रआयुध

त्रिशूल तीन नुकीले शिरों वाला वह शस्त्र है जिसे भगवान शिव अपने हाथ में धारण करते हैं। इसे शिव का सर्वाधिक विशिष्ट आयुध माना जाता है और यह उनकी प्रतिमा की पहचान का प्रमुख चिह्न है।

शिव के अतिरिक्त देवी दुर्गा भी त्रिशूल धारण करती हैं; दुर्गा सप्तशती के अनुसार यह उन्हें शिव से प्राप्त हुआ। शैव और शाक्त दोनों परंपराओं में त्रिशूल का विशेष स्थान है और मंदिरों में इसे शिवलिंग के निकट स्थापित किया जाता है।

त्रिशूल के तीन शिर प्रायः त्रिगुण — सत्त्व, रज और तम — अथवा तीन प्रकार के दुःखों (आध्यात्मिक, दैविक और भौतिक) के प्रतीक माने जाते हैं। विष्णुधर्मोत्तर पुराण में त्रिशूल को सुंदर श्यामवर्ण आयुध-पुरुष के रूप में वर्णित किया गया है।

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स्रोत: विष्णुधर्मोत्तर पुराण, दुर्गा सप्तशती, शिव पुराण