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आयुध

शब्दावली

अन्य नाम: आयुध, शस्त्र, दिव्य अस्त्र

मूर्ति-शास्त्रदेव-चिह्न

आयुध उन अस्त्र-शस्त्रों को कहते हैं जिन्हें देवता अपने हाथों में धारण करते हैं और जो उनकी शक्ति, गुण तथा कार्य के परिचायक होते हैं। परंपरा में अस्त्र (फेंके जाने वाले, मंत्र-सिद्ध) और शस्त्र (हाथ में धारण किए जाने वाले) का भेद किया जाता है; देव-प्रतिमा में प्रायः शस्त्र ही दिखाए जाते हैं।

प्रत्येक देवता का आयुध उसकी पहचान है — शिव का त्रिशूल, विष्णु का चक्र, गदा, पद्म और शंख, दुर्गा के अनेक आयुध, गणेश का अंकुश-पाश तथा इंद्र का वज्र। शिल्प-ग्रंथों में प्रायः प्रत्येक आयुध का एक मानव-रूप (आयुध-पुरुष) भी वर्णित है, जो उस देवता का आंशिक स्वरूप माना जाता है।

विष्णुधर्मोत्तर पुराण और विविध आगमों में आयुध-पुरुषों का स्वरूप बताया गया है — जैसे चक्र को गोल पेट और चक्राकार नेत्रों वाला, त्रिशूल को सुंदर श्यामवर्ण पुरुष और गदा को कमर वाली स्त्री-रूप। कुछ आयुधों का स्वरूप सौम्य और कुछ का उग्र होता है; ये भुजाएँ और आयुध देवता के स्वभाव एवं गुण के प्रदर्शक माने जाते हैं।

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त्रिशूलचक्रगदापद्मवज्रअंकुश

स्रोत: विष्णुधर्मोत्तर पुराण, शिल्प शास्त्र