वज्र
शब्दावली
अन्य नाम: वज्र, वज्रायुध
वज्र देवराज इंद्र का प्रधान अस्त्र है, जिसे बिजली के समान चमकने वाला और अत्यंत वेगवान माना गया है। पुराणों में वर्णन मिलता है कि यह ऋषि दधीचि की हड्डियों से बनाया गया था, इसीलिए यह तपस्या की शक्ति से भी जुड़ा माना जाता है।
इंद्र ने इसी वज्र से वृत्र जैसे महादैत्य का वध किया, जिससे पृथ्वी पर वर्षा और जल-प्रवाह पुनः लौटा। विष्णुधर्मोत्तर पुराण में वज्र का भी आयुध-पुरुष के रूप में वर्णन मिलता है; बौद्ध और जैन परंपराओं में भी वज्र एक महत्वपूर्ण चिह्न है।
आयुध के रूप में वज्र दृढ़ता, अभेद्यता और दिव्य आघात का प्रतीक है। शिल्प में इसे प्रायः दो मुखों वाली, बीच में कसी हुई आकृति के रूप में दर्शाया जाता है और यह इंद्र की प्रतिमा के साथ अंकित होता है।
संबंधित
स्रोत: ऋग्वेद, विष्णुधर्मोत्तर पुराण, शिल्प शास्त्र