सिद्धिदात्री
देवी एवं उपासना
अन्य नाम: सिद्धिदात्री देवी
सिद्धिदात्री नवदुर्गा का नवम और अंतिम स्वरूप हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियाँ देने वाली देवी हैं। इन्हें कमल पर विराजमान दिखाया जाता है और ये चार भुजाओं में शंख, चक्र, गदा और कमल धारण करती हैं।
इनका वर्णन नवदुर्गा परंपरा और नवदुर्गा स्तोत्र में मिलता है; नामावली में ये 'नवमं सिद्धिदात्री च' कहलाती हैं।
नवरात्रि के नवम दिन इनकी पूजा होती है। तिल तथा हलवा-पूरी का भोग अर्पित किया जाता है और 'ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः' मंत्र का जप किया जाता है। इनकी कृपा से ज्ञान, सिद्धि और सफलता की प्राप्ति मानी जाती है।
प्रसिद्ध कथन
ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात्सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
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स्रोत: देवी भागवत पुराण / नवदुर्गा परंपरा