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महागौरी

देवी एवं उपासना

अन्य नाम: महागौरी देवी

नवदुर्गादुर्गानवरात्रिशांति

महागौरी नवदुर्गा का अष्टम स्वरूप हैं। इनका वर्ण अत्यंत गौर (उजला) है और ये श्वेत वृषभ पर आरूढ़ होती हैं तथा श्वेत वस्त्र धारण करती हैं। इनका स्वरूप शांति और पवित्रता का प्रतीक है।

इनका वर्णन नवदुर्गा परंपरा और नवदुर्गा स्तोत्र में मिलता है; नामावली में ये 'महागौरीति चाष्टमम्' कहलाती हैं।

नवरात्रि के अष्टम दिन इनकी पूजा होती है। नारियल का भोग अर्पित किया जाता है और 'ॐ देवी महागौर्यै नमः' मंत्र का जप किया जाता है। इनकी उपासना सुख-शांति और मनोकामना-पूर्ति के लिए की जाती है।

प्रसिद्ध कथन

ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

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स्रोत: देवी भागवत पुराण / नवदुर्गा परंपरा