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अन्नपूर्णा

देवी एवं उपासना

अन्य नाम: अन्नदा, अन्नपूर्णा देवी, विशालाक्षी

देवीअन्नकाशीपोषण

अन्नपूर्णा अन्न, भोजन और पोषण की देवी हैं और माँ पार्वती का ही एक स्वरूप मानी जाती हैं। इनके हाथ में रत्नजड़ित अन्न-पात्र और करछुल रहती है। 'अन्नपूर्णा' का अर्थ है—अन्न से सबको पूर्ण करने वाली। माना जाता है कि प्राणियों को भोजन इन्हीं की कृपा से मिलता है।

इनका वर्णन स्कंद पुराण के 'काशीखंड' तथा ब्रह्मवैवर्त पुराण के काशी-रहस्य में मिलता है। आदि शंकराचार्य की 'अन्नपूर्णाष्टक' स्तोत्र-परंपरा भी इन्हीं से जुड़ी मानी जाती है।

काशी (वाराणसी) में विश्वनाथ मंदिर के निकट इनका प्रमुख मंदिर है; वर्तमान मंदिर मराठा पेशवा बाजीराव प्रथम द्वारा बनवाया गया। अन्नकूट और नवरात्रि पर विशेष पूजा होती है, और काशी की नवदुर्गा यात्रा में ये महागौरी के रूप में पूजी जाती हैं। यहाँ अन्नदान का विशेष महत्व है।

प्रसिद्ध कथन

ॐ अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरप्राणवल्लभे। ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥

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स्रोत: स्कन्द पुराण (काशीखंड)