मंगल
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: अंगारक, भौम, कुज, लोहित
मंगल नवग्रहों में तीसरा ग्रह है और अपने लाल रंग के कारण 'अंगारक' कहलाता है। इन्हें साहस, पराक्रम, ऊर्जा, भूमि और शक्ति का कारक माना जाता है। इनका वार मंगलवार और रंग लाल माना गया है। शास्त्रों में ये पृथ्वी के पुत्र माने गए हैं।
पुराणों के अनुसार मंगल को पृथ्वी से उत्पन्न और शिव-स्वरूप माना गया है। कुछ ग्रंथों में इन्हें दक्षिण-दिशा का रक्षक भी कहा गया है। ज्योतिष में इनका संबंध युद्ध, वीरता और धैर्य से जोड़ा जाता है।
ज्योतिष में मंगल भाई, भूमि, संपत्ति और शक्ति के भाव से जुड़े हैं। इनकी उपासना से बल, साहस और निर्णय-क्षमता की वृद्धि मानी जाती है। मंगल की शांति हेतु अनेक परंपरागत विधान प्रचलित हैं।
प्रसिद्ध कथन
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः॥
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स्रोत: परंपरा-प्रसिद्ध