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राशि

आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग

अन्य नाम: राशि चक्र, जन्मराशि

ज्योतिषराशिफलादेश

राशि ज्योतिष का मूल आधार है। क्रांतिवृत्त (राशि चक्र) को बारह बराबर भागों में बाँटा गया है, और इनमें से प्रत्येक भाग को एक राशि कहा जाता है। प्रत्येक राशि का एक नाम, स्वामी ग्रह, तत्व तथा स्वभाव निर्धारित है। मेष से मीन तक बारह राशियाँ क्रम से चलती हैं।

ज्योतिष-शास्त्र के ग्रंथों में राशियों का विस्तार से वर्णन मिलता है। वैदिक ज्योतिष में राशि का निर्धारण जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति से होता है, जिसे जन्मराशि कहा जाता है; ग्रह-स्पष्ट ज्योतिष में राशि का आधार सूर्य की स्थिति भी होता है।

राशि मनुष्य के स्वभाव, रुचि तथा जीवन-दिशा को समझने का साधन मानी जाती है। ग्रहों की राशि तथा भाव-स्थिति के आधार पर फलादेश किया जाता है। राशि, नक्षत्र तथा लग्न मिलकर कुंडली का आधार बनाते हैं।

प्रसिद्ध कथन

बारह राशियाँ मेष से आरंभ होकर मीन पर समाप्त होती हैं; प्रत्येक राशि का अपना स्वामी ग्रह और स्वभाव होता है। (भावानुवाद)

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नक्षत्रलग्नकुंडलीनवग्रहपंचांग

स्रोत: बृहत् संहिता