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ज्योतिष

शब्दावली

अन्य नाम: ज्योतिष शास्त्र, फलित ज्योतिष

वेदांगग्रहगणना

ज्योतिष शब्द ज्योति (प्रकाश) से बना है — अर्थात् ज्योतियों (ग्रह-नक्षत्रों) का शास्त्र। यह वेदों का एक प्रमुख अंग (वेदांग) है और इसे वेदों का नेत्र कहा जाता है, क्योंकि इसके बिना यज्ञ तथा शुभ कर्म का सही समय ज्ञात नहीं होता। ज्योतिष का मूल उद्देश्य काल-गणना तथा शुभ-अशुभ समय का ज्ञान है।

ज्योतिष के तीन मुख्य स्कंध माने गए हैं — सिद्धांत (ग्रहों की गणितीय गति), संहिता (राज्य, वर्षा, भूकंप आदि का फल) तथा होरा (फलित ज्योतिष — जन्मकुंडली के आधार पर व्यक्ति का फल)। नौ ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु) तथा 27 नक्षत्र इस शास्त्र के आधार हैं। बारह राशियाँ तथा बारह भाव भी इसी के अंग हैं।

प्राचीन ज्योतिषाचार्यों में पराशर, वराहमिहिर (बृहत्संहिता, बृहज्जातक) तथा कल्याणवर्मा आदि प्रसिद्ध हैं। ज्योतिष भारतीय जीवन में विवाह, यज्ञ, यात्रा तथा अन्य शुभ कार्यों के मुहूर्त-निर्धारण में आज भी प्रयुक्त होता है। यह शास्त्र गणित, खगोल तथा आध्यात्मिक विश्वास का संगम है।

प्रसिद्ध कथन

ज्योतिष वेद का नेत्र है, जिसके द्वारा यज्ञ तथा शुभ कर्म का समय जाना जाता है। (भावानुवाद — वेदांग परंपरा)

संबंधित

वेदांगनवग्रहसूर्यचंद्रशनिराहु

स्रोत: वेदांग ज्योतिष