अवतार
शब्दावली
अन्य नाम: अवतार, अवतरण
अवतार का अर्थ है ईश्वर का मनुष्य, पशु या अन्य रूप में पृथ्वी पर अवतरित होना। वैष्णव परंपरा में विष्णु के दशावतार प्रमुख हैं।
शास्त्रीय आधार: दशावतार — मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बलराम (या बुद्ध) और कल्कि। भागवत में अवतारों की सूची अधिक विस्तृत है; शिव और दुर्गा आदि के अवतार भी माने जाते हैं।
विस्तृत अर्थ: गीता के अनुसार अवतार तब होता है जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है; ईश्वर साधुओं की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म-संस्थापन के लिए जन्म लेते हैं।
उदाहरण: राम का अवतार रावण-वध के लिए और कृष्ण का कंस-वध तथा महाभारत में धर्म-रक्षा के लिए; वराह ने पृथ्वी उठाई और नरसिंह ने हिरण्यकशिपु का वध किया।
प्रसिद्ध कथन
'यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥' — जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब मैं स्वयं को रचता हूँ। (भगवद्गीता 4.7)
'परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥' — साधुओं की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म-स्थापन के लिए युग-युग में प्रकट होता हूँ। (भगवद्गीता 4.8)
संबंधित
स्रोत: भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत पुराण, विष्णु पुराण