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वेदांग

शब्दावली

अन्य नाम: वेदांग, षड्वेदांग

शिक्षाकल्पव्याकरणनिरुक्तछन्दज्योतिष

वेदांग वेदों के अंग कहे जाने वाले छह सहायक शास्त्र हैं, जो वेद-ज्ञान को समझने और यज्ञ-कर्म को ठीक से करने में सहायता करते हैं।

शास्त्रीय आधार: छह वेदांग हैं — शिक्षा (उच्चारण), कल्प (यज्ञ-विधि), व्याकरण (भाषा), निरुक्त (शब्द-व्युत्पत्ति), छन्द (छंदशास्त्र) और ज्योतिष (काल-गणना)। इन्हें 'वेदों के नेत्र' कहा जाता है।

विस्तृत अर्थ: शिक्षा से स्वर-उच्चारण शुद्ध होता है, ज्योतिष से यज्ञ का समय निश्चित होता है, कल्प से कर्मकांड, तथा व्याकरण और निरुक्त से वेद-मंत्रों का अर्थ समझ आता है; छन्द से मंत्रों की गेयता सधती है।

उदाहरण: पाणिनि का व्याकरण वेदांग-परंपरा की चरम परिणति है; यज्ञ-समय-निर्धारण के लिए ज्योतिष वेदांग का प्रयोग होता है।

प्रसिद्ध कथन

'षडंगानि वेदस्य' — वेद के छह अंग हैं। (भावानुवाद)
'वेदांगानि षट्' — वेदांग छह हैं। (भावानुवाद)

संबंधित

चार वेदउपनिषदयज्ञऋषिस्मृतिपुराण

स्रोत: मुण्डक उपनिषद, पाणिनि व्याकरण, ज्योतिष-शास्त्र