इष्ट
शब्दावली
अन्य नाम: इष्टापूर्त, इष्ट-कर्म
इष्ट का अर्थ है — इच्छित अथवा अभीष्ट; कर्म-सन्दर्भ में इष्ट उन शुभ कर्मों को कहा जाता है जो यज्ञ, होम, तप, सत्य, वेदाध्ययन, आतिथ्य तथा वैश्वदेव आदि हैं। यह पूर्त का सहचर शब्द है; दोनों मिलकर इष्टापूर्त कहलाते हैं।
शास्त्रीय आधार — मार्कण्डेय पुराण तथा अत्रिसंहिता आदि स्मृति-ग्रंथों में इष्ट का लक्षण मिलता है। भगवद्गीता में भी यज्ञ, दान तथा तप को न त्यागने योग्य कर्म कहा गया है।
विधि एवं महत्व — इष्ट-कर्म द्वारा व्यक्ति स्वर्ग तथा पुण्य प्राप्त करता है और यह द्विजों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य) का सामान्य धर्म-साधन माना गया है। इसे शरीर तथा लोक-कल्याण से जोड़ा गया है।
प्रसिद्ध कथन
अग्निहोत्रं तपः सत्यं वेदानां चैव साधनम् । आतिथ्यं वैश्वदेवं च इष्टमित्यभिधीयते ॥ (मार्कण्डेय पुराण)
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स्रोत: मार्कण्डेय पुराण, अत्रिसंहिता