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हवन

शब्दावली

अन्य नाम: होम, हवन-यज्ञ

यज्ञअग्निअनुष्ठान

हवन (होम) वह धार्मिक कर्म है जिसमें पवित्र अग्नि में घृत, सामग्री तथा समिधा आदि की आहुति दी जाती है। हवन में मंत्रोच्चार के साथ अग्नि को देवता मानकर आवाहन किया जाता है और आहुति द्वारा देवताओं तथा पितरों को तृप्त किया जाता है। यह यज्ञ का ही लघु तथा गृहस्थ-अनुकूल रूप है, जिसे कोई भी गृहस्थ अपने घर में कर सकता है।

हवन की अनेक विधियाँ हैं — सामान्य हवन, गणपति हवन, नवग्रह हवन, महामृत्युंजय हवन, सत्यनारायण हवन तथा सुदर्शन हवन आदि। हवन में समिधा (पीपल, आम आदि की लकड़ी), घृत, गुग्गुल, नारियल तथा विशेष सामग्री प्रयुक्त होती है। अंत में स्वाहा तथा स्वधा का उच्चारण करके आहुति दी जाती है, और पूर्णाहुति के साथ हवन समाप्त होता है।

हवन का उद्देश्य केवल देव-तर्पण नहीं है, बल्कि यह वातावरण को शुद्ध करता है, नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है और मंगल की वृद्धि करता है। शास्त्रों के अनुसार यज्ञ तथा हवन से वर्षा होती है और अन्न उत्पन्न होता है — यज्ञाद् भवति पर्जन्यः। गृह-प्रवेश, विवाह तथा अन्य शुभ कार्यों में हवन आवश्यक माना जाता है।

प्रसिद्ध कथन

अग्नि में मंत्रोच्चार के साथ दी जाने वाली आहुति से देवता तथा पितर तृप्त होते हैं। (भावानुवाद — गृह्य-सूत्र परंपरा)
यज्ञाद् भवति पर्जन्यः। (भगवद्गीता 3.14 — भावानुवाद: यज्ञ से वर्षा होती है।)

संबंधित

यज्ञअग्निमंत्रजपदानव्रत

स्रोत: गृह्य सूत्र