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होम

शब्दावली

अन्य नाम: हवन, होम-हवन

यज्ञकर्मकांड

होम का अर्थ है — अग्नि में मंत्रोच्चार के साथ द्रव्य (घृत, दूध, अन्न आदि) की आहुति देना। 'हु' धातु से बना यह शब्द आहुति देने का सूचक है।

शास्त्रीय आधार — यजुर्वेद, समस्त ब्राह्मण-ग्रंथों तथा गृह्यसूत्रों में होम की विधि का विस्तृत वर्णन मिलता है। मनुस्मृति में होम को 'देवयज्ञ' कहा गया है।

विधि एवं महत्व — होम प्रत्येक यज्ञ का केंद्रीय अंग है। यह नित्य (जैसे अग्निहोत्र), नैमित्तिक तथा काम्य — अनेक रूपों में किया जाता है। आहुति के साथ 'स्वाहा' शब्द का उच्चारण होता है और प्रायः 'इदं न मम' (यह मेरा नहीं) कहकर समर्पण-भाव प्रकट किया जाता है। होम को देवताओं तक संकल्प पहुँचाने तथा वातावरण शुद्ध करने वाला माना गया है।

प्रसिद्ध कथन

ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् । ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना ॥ (भगवद्गीता 4.24)

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यज्ञहवनअग्निहोत्रपंचमहायज्ञकर्म

स्रोत: भगवद्गीता, यजुर्वेद