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दर्श-पूर्णमास

शब्दावली

अन्य नाम: दर्शपूर्णमास, दर्श-पूर्णमास इष्टि

यज्ञहविर्यज्ञइष्टि

दर्श-पूर्णमास वह श्रौत यज्ञ है जो अमावस्या (दर्श) तथा पूर्णिमा (पूर्णमास) के दिन किया जाता है। यह गृहस्थ का नियमित अर्धमासिक यज्ञ है।

शास्त्रीय आधार — शुक्ल यजुर्वेद के प्रथम दो अध्याय तथा शतपथ ब्राह्मण के प्रथम कांड में इसका विस्तृत विधान मिलता है। इसे समस्त इष्टियों का मूल आदर्श (प्रकृति) माना गया है।

विधि एवं महत्व — दर्शेष्टि तथा पौर्णमासेष्टि में कुल छह प्रधान याग होते हैं; अग्नि, इन्द्र तथा सोम आदि देवताओं को पुरोडाश, चरु एवं दधि की आहुति दी जाती है। यजमान इसे पत्नी सहित तथा चार ऋत्विजों की सहायता से करता है। यह यजमान को आत्मिक एवं लौकिक उन्नति देने तथा सृष्टि-सञ्चालन में सहायक माना गया है।

प्रसिद्ध कथन

दर्शपूर्णमासाविष्टीनां प्रकृतिः । (आपस्तम्ब श्रौतसूत्र)

संबंधित

यज्ञअग्निहोत्रचातुर्मास्यपंचमहायज्ञहवनकर्म

स्रोत: शुक्ल यजुर्वेद, शतपथ ब्राह्मण