चातुर्मास्य
शब्दावली
अन्य नाम: चातुर्मास्य यज्ञ
चातुर्मास्य वह श्रौत यज्ञ है जो प्रत्येक चौथे महीने में किया जाता है। इसके नाम में ही इसका काल — चार महीने — निहित है।
शास्त्रीय आधार — यजुर्वेद तथा शतपथ ब्राह्मण के द्वितीय कांड में इसका विधान मिलता है। इसे हविर्यज्ञों की श्रेणी में रखा गया है।
विधि एवं महत्व — इसके चार पर्व होते हैं — वैश्वदेव, वरुणप्रघास, साकमेध तथा शुनासीरीय। वैश्वदेव पर्व संतति-प्राप्ति हेतु किया जाता है; इनमें पुरोडाश, चरु तथा पयस्या की आहुति होती है। यह वर्षभर के यज्ञ-क्रम को ऋतुओं से जोड़ता है।
संबंधित
स्रोत: यजुर्वेद, शतपथ ब्राह्मण