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ब्रह्मांड

वेद एवं पुराण

अन्य नाम: ब्रह्माण्ड, विश्व, जगत, अंड

सृष्टिब्रह्माहिरण्यगर्भकाल

ब्रह्मांड समस्त विश्व का नाम है, जिसे शास्त्रों में अंडाकार माना गया है। पुराणों के अनुसार यह ब्रह्मा के अंड से उत्पन्न हुआ, इसीलिए 'ब्रह्मांड' कहलाया। इसके भीतर अनेक लोक, द्वीप, समुद्र और ग्रह स्थित माने जाते हैं। इसे अनंत, विशाल और चक्राकार वर्णित किया गया है।

विष्णु पुराण में वर्णन है कि कल्प के आरंभ में हिरण्यगर्भ रूपी स्वर्ण-अंड से समस्त जगत् प्रकट हुआ। इस अंड के भीतर ही ब्रह्मा प्रकट होकर सृष्टि की रचना करते हैं। अंड के बाहर अनंत आकाश और अनेक ब्रह्मांड माने गए हैं। इस प्रकार ब्रह्मांड की कल्पना अत्यंत विराट और अनंत रूप में की गई है।

ब्रह्मांड का संबंध हिरण्यगर्भ, सृष्टि, सप्तलोक और सप्तद्वीप से गहरा माना जाता है। भगवद्गीता में इसे भगवान के विराट स्वरूप के रूप में वर्णित किया गया है। इस प्रकार ब्रह्मांड सृष्टि-वर्णन का सबसे व्यापक और विराट अंग माना जाता है।

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हिरण्यगर्भसृष्टिसप्तलोकब्रह्माविष्णुसप्तद्वीप

स्रोत: विष्णु पुराण