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जम्बूद्वीप

वेद एवं पुराण

अन्य नाम: जंबूद्वीप, जम्बू द्वीप

सृष्टिभूगोलभारतपृथ्वी

जम्बूद्वीप सप्तद्वीपों में सबसे भीतरी और केंद्रीय द्वीप माना जाता है। इसका नाम 'जम्बू' नामक विशाल वृक्ष के कारण पड़ा माना जाता है। पुराणों के अनुसार इसके मध्य में सुमेरु पर्वत स्थित है, जिसके चारों ओर सूर्य चक्कर लगाता माना जाता है। इस द्वीप में नौ वर्ष (विभाग) बताए गए हैं, जिनमें इलावृत वर्ष केंद्र में है।

विष्णु पुराण और भागवत पुराण में जम्बूद्वीप का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसके भीतर भारतवर्ष, किंपुरुष, हरिवर्ष, भद्राश्व आदि वर्षों की स्थिति बताई गई है। भारतवर्ष को कर्म-भूमि और मोक्ष-भूमि माना गया है, जहाँ मनुष्य कर्म करके मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं।

जम्बूद्वीप का संबंध सप्तद्वीप, ब्रह्मांड और सृष्टि-वर्णन से गहरा माना जाता है। यह भारत की पवित्रता और कर्म-भूमि होने का शास्त्रीय आधार प्रस्तुत करता है। इस प्रकार जम्बूद्वीप भारतीय भूगोल-कल्पना का केंद्र माना जाता है।

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स्रोत: विष्णु पुराण