सप्तलोक
शब्दावली
अन्य नाम: सात लोक
लोक का अर्थ है भुवन या निवास-स्थान। पौराणिक ब्रह्माण्ड में ऊर्ध्व दिशा में सात लोक माने गए हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से सप्तलोक कहा जाता है — भूर्लोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक। ये सातों लोक क्रमशः ऊपर की ओर अधिक सूक्ष्म तथा पवित्र माने जाते हैं।
भूर्लोक यह पृथ्वी है, भुवर्लोक अंतरिक्ष का क्षेत्र है और स्वर्लोक देवताओं का स्वर्ग है। महर्लोक से ऊपर के लोक उच्च साधकों, ऋषियों तथा तपस्वियों के निवास बताए गए हैं। तपोलोक तपस्या के फलस्वरूप प्राप्त होता है और सबसे ऊपर सत्यलोक (ब्रह्मलोक) है, जो ब्रह्मा जी का निवास है।
ॐ भूर्भुवः स्वः — गायत्री मंत्र के प्रथम तीन पद इन्हीं पहले तीन लोकों के नाम हैं। इस प्रकार सप्तलोक की अवधारणा सृष्टि की ऊर्ध्व रचना तथा साधना के आध्यात्मिक स्तरों, दोनों को व्यक्त करती है। सप्तलोक के विपरीत सात अधोलोक (अतल से पाताल तक) माने गए हैं।
प्रसिद्ध कथन
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स्रोत: विष्णु पुराण