मोक्ष
शब्दावली
अन्य नाम: मोक्ष, मुक्ति, कैवल्य
मोक्ष का अर्थ है जन्म-मरण के चक्र (संसार) से स्थायी मुक्ति। यह चार पुरुषार्थों में अंतिम और परम साध्य माना जाता है।
शास्त्रीय आधार: मोक्ष की प्राप्ति ज्ञान (आत्म-साक्षात्कार), भक्ति, या कर्म-शुद्धि से मानी जाती है — भिन्न दर्शनों में भिन्न मार्ग। अद्वैत में ब्रह्म-ज्ञान से, वैष्णव मत में विष्णु-भक्ति से और कर्म-मार्ग में निष्काम कर्म से मोक्ष कहा गया।
विस्तृत अर्थ: मोक्ष वह अवस्था है जहाँ आत्मा अविद्या और कर्म-बंधन से मुक्त होकर ब्रह्म में लीन हो जाती है। गीता में इसे 'ब्रह्म-निर्वाण' कहा गया।
उदाहरण: काशी में मरण से मोक्ष की मान्यता, तथा गीता के अनुसार भक्ति से परम गति की प्राप्ति।
प्रसिद्ध कथन
'मोक्षो नाम संसारबन्धनान्मुक्तिः' — मोक्ष संसार के बंधन से मुक्ति है। (भावानुवाद)
'बन्धनान्मुक्तिरेव मोक्षः' — बंधन से मुक्ति ही मोक्ष है। (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: भगवद्गीता, उपनिषद, वेदांत-सूत्र