पुरुषार्थ
शब्दावली
अन्य नाम: पुरुषार्थ, चतुर्विध पुरुषार्थ
पुरुषार्थ का अर्थ है मनुष्य के जीवन के उद्देश्य या साध्य। भारतीय परंपरा में चार पुरुषार्थ माने गए हैं — धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष।
शास्त्रीय आधार: धर्म (कर्तव्य और नैतिकता), अर्थ (धन और साधन), काम (इच्छा और सुख) तथा मोक्ष (जन्म-मरण से मुक्ति)। इनका समन्वय जीवन-व्यवस्था का आधार है।
विस्तृत अर्थ: चारों पुरुषार्थ क्रमबद्ध हैं — धर्म के अनुसार अर्थ और काम, और अंत में मोक्ष। धर्म इन सबका नियामक है; धर्म-विरुद्ध अर्थ या काम हेय माने गए।
उदाहरण: युधिष्ठिर धर्म-पुरुषार्थ का उदाहरण हैं, अर्थ-पुरुषार्थ में राज्य-व्यवस्था, काम में गृहस्थ-जीवन, और मोक्ष में संन्यास या ज्ञान-मार्ग।
प्रसिद्ध कथन
'धर्मार्थकाममोक्षाणां श्रेयान् धर्मः' — धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में धर्म श्रेष्ठ है। (भावानुवाद)
'चत्वारि पुरुषार्थाः' — चार पुरुषार्थ माने गए हैं। (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: मनुस्मृति, महाभारत, वेदांत-परंपरा