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वेदव्यास

महाभारत

अन्य नाम: व्यास, कृष्णद्वैपायन, वेदव्यास, पराशरपुत्र, बादरायण

वेदमहाभारतसत्यवतीपराशररचयिता

वेदव्यास पराशर ऋषि और सत्यवती के पुत्र थे; यमुना के एक द्वीप पर जन्म लेने के कारण वे ‘द्वैपायन’ और कृष्ण वर्ण के कारण ‘कृष्णद्वैपायन’ कहलाए। उन्होंने एक ही वेद को ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद में विभाजित किया, इसीलिए वे ‘वेदव्यास’ कहलाए। वे पुराणों और ब्रह्मसूत्र के रचयिता भी माने जाते हैं।

कुरुवंश की रक्षा के लिए उन्होंने नियोग-प्रथा के अंतर्गत अंबिका से धृतराष्ट्र, अंबालिका से पांडु और दासी परीक्षित्रा से विदुर को जन्म दिया। इस प्रकार वे कुरुवंश के पितामह भी हुए।

उन्होंने महाभारत की रचना की, जिसे गणेशजी ने लिखने का भार लिया — शर्त यह थी कि व्यास बिना रुके श्लोक कहेंगे और गणेश अर्थ समझकर लिखेंगे। व्यास ने ‘भारत’ को जय, भारत और महाभारत के रूप में विस्तार दिया। युद्ध के बाद उन्होंने गांधारी, धृतराष्ट्र और कुंती को आश्वासन दिया तथा परीक्षित को शिक्षा दी। वे ज्ञान, तप और रचना-शक्ति के सर्वोच्च प्रतीक हैं।

नाते-रिश्ते

  • पिता: पराशर ऋषि, माता: सत्यवती
  • पुत्र: धृतराष्ट्र, पांडु, विदुर
  • पौत्र: कौरव-पांडव

पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध

विष्णु के अंश से जन्मे; पूर्वजन्म में ऋषि अपरांतमस थे।

प्रसिद्ध कथन

गणेश से शर्त (भावानुवाद) — “आप लिखें, परंतु एक क्षण भी बिना अर्थ समझे न लिखें।”
महाभारत के विषय में (भावानुवाद) — “इस ग्रंथ में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों का विवेचन है; जो इसमें नहीं है, वह कहीं नहीं है।”

संबंधित

सत्यवतीशांतनुगणेशभीष्मपांडुधृतराष्ट्र

स्रोत: महाभारत – आदि पर्व; आश्रमवासिक पर्व