परीक्षित
महाभारत
अन्य नाम: परिक्षित
परीक्षित अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र थे। कुरुक्षेत्र युद्ध में पिता की मृत्यु के बाद वे माता के गर्भ में ही अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से मृत हुए, पर श्रीकृष्ण की कृपा से जीवित हुए और जन्म के बाद उन्हें परीक्षित नाम मिला।
पांडवों के वानप्रस्थ लेने पर परीक्षित हस्तिनापुर के राजा बने। वे धर्मपरायण और प्रजापालक राजा थे। राज्य के अंतिम काल में उनके राज्य में कलियुग का प्रभाव बढ़ा।
एक बार शिकार में परीक्षित ने शमीक ऋषि के पुत्र शृंगी द्वारा दिए शाप के कारण सातवें दिन तक्षक नाग के डंक से प्राण त्याग दिए। परीक्षित की कथा आगे भागवत और कलियुग की कथाओं से भी जुड़ती है; उनके पुत्र जनमेजय हुए।
नाते-रिश्ते
- पिता: अभिमन्यु
- माता: उत्तरा
- पुत्र: जनमेजय
- पितामह: अर्जुन
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
गर्भ में अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से मृत्यु को प्राप्त होकर श्रीकृष्ण की कृपा से पुनर्जीवित हुए।
संबंधित
स्रोत: महाभारत – सौप्तिक पर्व, आश्रमवासिक पर्व