आभूषण
शब्दावली
अन्य नाम: अलंकार, भूषण, श्रृंगार
आभूषण अथवा अलंकार देव-प्रतिमा के उन श्रृंगारों को कहते हैं जो शास्त्र-निर्धारित रूप, माप और वर्ग के अनुसार धारण कराए जाते हैं। शिल्प-ग्रंथों में अलंकार को प्रतिमा की शोभा बढ़ाने वाला तथा देवता की गरिमा और पद का सूचक माना गया है।
मानसार के 'मौलि-लक्षण' में मुकुटों के अनेक भेद बताए गए हैं — जटा, मौलि, किरीट, करंड, शिरस्त्रक, कुंतल, केशबंध, मुकुट आदि। इनमें जटा और मुकुट ब्रह्मा तथा शिव के लिए, किरीट और मुकुट विष्णु के लिए तथा करंड और मुकुट अन्य देवताओं के लिए उपयुक्त कहे गए हैं।
मुकुट के अतिरिक्त कुंडल, हार, कंकण, केयूर, मेखला और नूपुर आदि आभूषण प्रतिमा पर अंकित होते हैं। प्रायः प्रमुख देवताओं की प्रतिमाएँ समृद्ध अलंकारों से विभूषित और गौण देवताओं या मनुष्यों की प्रतिमाएँ सादे आभूषणों से युक्त बनाई जाती हैं; होयसल शिल्प अपने समृद्ध अलंकरण के लिए प्रसिद्ध है।
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स्रोत: मानसार, शिल्प शास्त्र