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भीम

महाभारत

अन्य नाम: भीमसेन, वायुपुत्र, जरासंधजित्, भीमसेन

पांडवबलवायुगदाहिडिंबा

भीम कुंती और वायुदेव के पुत्र तथा पांडवों में दूसरे थे। जन्म से ही अत्यंत बलशाली होने के कारण बाल्यकाल में उन्होंने दुर्योधन आदि कौरवों के साथ कठोर क्रीड़ाएँ कीं। लाक्षागृह के षड्यंत्र से पांडव बच निकले, और वन में भीम ने हिडिंब राक्षस का वध किया तथा हिडिंबा से उनके पुत्र घटोत्कच का जन्म हुआ। एकचक्रा नगरी में उन्होंने बकासुर को मारा।

द्रौपदी-स्वयंवर के बाद जरासंध का वध उन्होंने कृष्ण के संकेत पर द्वंद्व-युद्ध में किया। द्यूतसभा में द्रौपदी के चीरहरण और अपमान को उन्होंने नहीं भुलाया — उसी समय उन्होंने दुःशासन की भुजा तोड़कर रक्त पीने और दुर्योधन की जंघा तोड़ने की प्रतिज्ञा की। वनवास में उन्होंने सौगंधिक पुष्प लाने के लिए यात्रा की और कुबेर के उद्यान में राक्षसों से लड़े।

कुरुक्षेत्र में उन्होंने गदा-युद्ध में कौरव-सेना का विनाश किया। उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा पूरी की — दुःशासन को मारकर उसका रक्त पिया और अंतिम दिन गदा-युद्ध में दुर्योधन की जंघा तोड़ दी। भोजन-प्रेमी, हास्यप्रिय और अपने प्रियजनों के प्रति अत्यंत स्नेही भीम अपने क्रोध और प्रतिशोध के लिए भी जाने जाते हैं। युद्ध के बाद वे भी भाइयों के साथ महाप्रस्थान में चले।

नाते-रिश्ते

  • पिता: पांडु (देवता: वायु), माता: कुंती
  • भाई: युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव
  • पत्नी: हिडिंबा, द्रौपदी
  • पुत्र: घटोत्कच
  • गुरु: द्रोणाचार्य

पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध

वायुदेव के अंश से जन्मे; पूर्वजन्म में वायु का अंश थे।

प्रसिद्ध कथन

चीरहरण के समय की प्रतिज्ञा (भावानुवाद) — “जब तक मैं दुःशासन की भुजा तोड़कर उसका रक्त न पिऊँ और दुर्योधन की जंघा न तोड़ूँ, तब तक मुझे शांति नहीं।”
द्रौपदी के अपमान पर भीम का क्रोध-भाव — “इस सभा में जो हुआ, उसका उत्तर मेरी गदा देगी।”

संबंधित

युधिष्ठिरद्रौपदीदुःशासनदुर्योधनघटोत्कचजरासंध

स्रोत: महाभारत – आदि पर्व; द्रोण पर्व