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नकुल

महाभारत

अन्य नाम: माद्रीपुत्र, अश्विनेय, नकुल

पांडवअश्विनीकुमारअश्वविद्यामाद्री

नकुल माद्री और अश्विनीकुमार के पुत्र तथा सहदेव के जुड़वाँ भाई थे। वे पाँचों पांडवों में चौथे थे और अपनी सुंदरता, विनम्रता तथा अश्वों की परख के लिए प्रसिद्ध थे। पांडु की मृत्यु के बाद माद्री ने उन्हें कुंती को सौंप दिया, इसीलिए कुंती ने पाँचों को समान स्नेह से पाला।

द्रौपदी-स्वयंवर के बाद वे भी द्रौपदी के पति बने और इंद्रप्रस्थ तथा द्यूत के दुःखद प्रसंगों में भाइयों के साथ रहे। बारह वर्ष के वनवास में जब यक्ष ने उन्हें मार डाला, तो युधिष्ठिर ने यक्ष से वर माँगकर उन्हें ही जीवित कराया — यह उनके प्रति धर्मराज के विशेष स्नेह का प्रतीक है।

अज्ञातवास में वे विराट नगर में अश्वों की देखभाल करने वाले ‘ग्रंथिक’ बने। कुरुक्षेत्र युद्ध में वे पांडव-पक्ष के महारथी थे और अपने भाइयों के साथ अनेक युद्धों में लड़े। युद्ध के बाद वे भी महाप्रस्थान में भाइयों के साथ चले।

नाते-रिश्ते

  • पिता: पांडु (देवता: अश्विनीकुमार), माता: माद्री
  • भाई: युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, सहदेव
  • पत्नी: द्रौपदी

पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध

अश्विनीकुमारों के अंश से जन्मे; पूर्वजन्म में अश्विन का अंश थे।

प्रसिद्ध कथन

यक्ष-प्रश्न प्रसंग (भावानुवाद) — यक्ष ने एक भाई को जीवित करने का वर दिया और युधिष्ठिर ने कहा, “जब कुंती के पुत्र जीवित हैं, तो मैं माद्री के पुत्र नकुल को जिलाना चाहता हूँ, ताकि दोनों माताओं की संतान रहे।”

संबंधित

सहदेवयुधिष्ठिरद्रौपदीअर्जुनकुंतीपांडु

स्रोत: महाभारत – आदि पर्व; वन पर्व