सहदेव
महाभारत
अन्य नाम: माद्रीपुत्र, अश्विनेय, सहदेव
सहदेव माद्री और अश्विनीकुमार के पुत्र तथा नकुल के जुड़वाँ भाई थे। वे पाँचों पांडवों में सबसे छोटे थे और अपनी बुद्धि, ज्योतिष-ज्ञान तथा शास्त्र-पठन के लिए जाने जाते थे। परंपरा में उन्हें ग्रह-नक्षत्रों और शकुन-अपशकुन का गहरा ज्ञाता माना गया है।
द्रौपदी-स्वयंवर के बाद वे भी द्रौपदी के पति बने और भाइयों के साथ इंद्रप्रस्थ में रहे। द्यूत-प्रसंग में उन्होंने भी अपमान सहा। बारह वर्ष के वनवास और एक वर्ष के अज्ञातवास में उन्होंने विराट नगर में गो-रक्षक ‘तंतिपाल’ का रूप धारण किया।
कुरुक्षेत्र में वे पांडव-पक्ष के महारथी थे और अनेक दिनों तक युद्ध में लड़े। युद्ध के बाद वे भी भाइयों के साथ रहे और अंत में महाप्रस्थान में उनके साथ चले।
नाते-रिश्ते
- पिता: पांडु (देवता: अश्विनीकुमार), माता: माद्री
- भाई: युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल
- पत्नी: द्रौपदी
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
अश्विनीकुमारों के अंश से जन्मे; पूर्वजन्म में अश्विन का अंश थे।
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: महाभारत – आदि पर्व; विराट पर्व