विष्णु सहस्रनाम
ग्रंथ
अन्य नाम: विष्णुसहस्रनाम, विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र
रचयिता / कर्ता: वेदव्यास (महाभारत में भीष्म-प्रोक्त)
विष्णु सहस्रनाम भगवान विष्णु के एक हज़ार नामों का प्रसिद्ध स्तोत्र है। यह महाभारत के अनुशासन पर्व में स्थित है, जहाँ शर-शय्या पर लेटे भीष्म ने युधिष्ठिर के प्रश्न पर यह स्तोत्र कहा।
परंपरा के अनुसार इसके रचयिता वेदव्यास हैं और इसकी कथा में स्वयं भगवान कृष्ण, भीष्म, युधिष्ठिर तथा व्यास उपस्थित थे। इसमें विष्णु के सहस्र नाम उनके अनेक रूपों, गुणों और विभूतियों का वर्णन करते हैं।
स्तोत्र का पाठ करने से पाप-नाश, भय-निवारण, समृद्धि तथा मोक्ष की प्राप्ति का फल बताया गया है। इसके साथ पूर्व और उत्तर भाग में पद्मपुराण आधारित स्तुति भी जोड़ी जाती है।
महात्मा: यह वैष्णव परंपरा का सर्वाधिक पढ़ा जाने वाला स्तोत्र है और अनेक संतों तथा आचार्यों ने इसकी टीका लिखी है।
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: महाभारत, अनुशासन पर्व