मीमांसा सूत्र
ग्रंथ
अन्य नाम: पूर्व मीमांसा सूत्र, मीमांसासूत्र, पूर्वमीमांसासूत्रम्
रचयिता / कर्ता: जैमिनि
मीमांसा सूत्र (पूर्व मीमांसा सूत्र) पूर्व मीमांसा दर्शन का मूल ग्रंथ है, जिसके रचयिता महर्षि जैमिनि माने जाते हैं। ग्रंथ बारह अध्यायों में विभाजित है।
मुख्य विषय धर्म की मीमांसा (विचार) है — धर्म का ज्ञान वेद-वचन (शब्द-प्रमाण) से होता है। ग्रंथ यज्ञ, कर्मकांड, मंत्र, देवता तथा वेद-वाक्यों के अर्थ-निर्णय पर केंद्रित है।
इस दर्शन में कर्म और यज्ञ को प्रधानता दी गई है और अपूर्व (अदृष्ट) के सिद्धांत से कर्म-फल की व्याख्या की गई है। यह वेदों की नित्यता और अपौरुषेयता का समर्थन करता है।
महात्मा: वैदिक कर्मकांड और धर्म-मीमांसा का यह मूल आधार है; वेदांत के साथ मिलकर यह 'पूर्व-उत्तर मीमांसा' की परंपरा बनाता है।
प्रसिद्ध कथन
अथातो धर्मजिज्ञासा॥ (१.१.१)
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स्रोत: मीमांसा सूत्र