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ललिता सहस्रनाम

ग्रंथ

अन्य नाम: ललितासहस्रनाम, ललिता सहस्रनाम स्तोत्र

रचयिता / कर्ता: परंपरा-प्रसिद्ध (ब्रह्माण्ड पुराण)

स्तोत्रदेवीसहस्रनामश्रीविद्या

ललिता सहस्रनाम देवी ललिता (ललिता त्रिपुरसुंदरी) के एक हज़ार नामों का प्रसिद्ध शाक्त स्तोत्र है। यह ब्रह्माण्ड पुराण के 'ललितोपाख्यान' में स्थित है।

परंपरा के अनुसार यह स्तोत्र अष्ट वाग्देवियों (वशिनी आदि) द्वारा माता ललिता की स्तुति रूप में गाया गया। इसमें देवी के रूप, गुण, श्रीविद्या तथा राजराजेश्वरी-तत्व का वर्णन है।

यह स्तोत्र श्रीविद्या परंपरा में अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसके प्रत्येक नाम को मंत्र के रूप में माना जाता है। इसका पाठ दीक्षा तथा देवी-उपासना में किया जाता है।

महात्मा: शाक्त और श्रीविद्या उपासना में इसका सर्वोच्च स्थान है; देवी-भक्ति का यह अत्यंत प्रसिद्ध स्तोत्र है।

प्रसिद्ध कथन

श्रीमाता श्रीमहाराज्ञी श्रीमत्सिंहासनेश्वरी। चिदग्निकुण्डसम्भूता देवकार्यसमुद्यता॥ (प्रथम नाम)

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स्रोत: ब्रह्माण्ड पुराण, ललितोपाख्यान